सांस्कृतिक एवं तकनीकी धरोहर ब्यूरो। भारत ज्ञान और विमर्श की उस प्राचीनतम भूमि का नाम है, जहां तक्षशिला और नालंदा के विशाल पुस्तकालयों में लाखों अमूल्य ग्रंथ मानवता के पथ-प्रदर्शन के लिए संजोए गए थे। आक्रांताओं के हमलों और समय के थपेड़ों में बहुत कुछ नष्ट होने के बावजूद, आज भी भारत के पास लगभग 50 लाख से अधिक प्राचीन पांडुलिपियों का विशाल भंडार मौजूद है, जो गणित, खगोलशास्त्र, धातु विज्ञान, आयुर्वेद, योग, दर्शन और संगीत के गूढ़ रहस्यों को अपने सीने में समेटे हुए हैं। इस अमूल्य ज्ञान धरोहर को सुरक्षित रखने के लिए ‘डिजिटल धरोहर मिशन’ के तहत 10 लाख से अधिक पांडुलिपियों का उच्च तकनीक से डिजिटलीकरण और संरक्षण कार्य युद्ध स्तर पर जारी है।
समय की मार से प्राचीन ज्ञान को बचाने का महाअभियान
ताड़पत्रों और भोजपत्रों पर जैविक स्याही से लिखी ये पांडुलिपियां अत्यधिक नाजुक होती हैं। नमी, दीमक और फफूंद के कारण इनके नष्ट होने का भारी खतरा बना रहता था। कई दुर्लभ ग्रंथ देश के सुदूर मठों, मंदिरों, गुरुकुलों और व्यक्तिगत संग्रहों में जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पड़े थे।
राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन (NMM) और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से अत्याधुनिक ऑप्टिकल स्कैनर, लेजर क्लीनिंग और नॉन-डिस्ट्रक्टिव तकनीकों का उपयोग कर इन दस्तावेजों को 4K रेजोल्यूशन में स्कैन किया जा रहा है।
“ये पांडुलिपियां केवल पुराने कागज या ताड़पत्र नहीं हैं, बल्कि ये मानव सभ्यता के सबसे उन्नत ज्ञान और वैज्ञानिक दृष्टि की अमर वसीयत हैं। इनका संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा सबसे बड़ा ऋण है।”
— राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन निदेशक
डिजिटल धरोहर मिशन के 4 प्रमुख आयाम
- 10 लाख पांडुलिपियों का क्लाउड संग्रह: दुनिया भर के शोधार्थियों और विश्वविद्यालयों के लिए ‘ज्ञान भारतम’ पोर्टल पर निशुल्क डिजिटल लाइब्रेरी।
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ओसीआर (OCR): ब्राह्मी, शारदा, ग्रंथ, नेवारी और मोडी जैसी प्राचीन और लुप्तप्राय लिपियों का एआई द्वारा आधुनिक भाषाओं में स्वत: अनुवाद।
- प्राचीन वैज्ञानिक ज्ञान का व्यावहारिक परीक्षण: आयुर्वेद, खगोल और स्थापत्य से संबंधित नुस्खों और गणितीय सूत्रों का IITs और शोध संस्थानों द्वारा प्रयोगशाला परीक्षण।
- जीर्णोद्धार और रासायनिक संरक्षण: क्षतिग्रस्त मूल भोजपत्रों को विशेष औषधीय लेपों और लैमिनेशन तकनीक से आगामी 500 वर्षों के लिए सुरक्षित करना।
वैश्विक ज्ञान संपदा के रूप में भारत का स्थान
यह परियोजना भारत को वैश्विक ज्ञान अर्थव्यवस्था का सिरमौर बनाने में मील का पत्थर साबित होगी। जब हमारे प्राचीन ग्रंथ डिजिटाइज होकर दुनिया के सामने आएंगे, तो यह निर्विवाद रूप से सिद्ध हो जाएगा कि आधुनिक विज्ञान के अनेक सिद्धांतों की नींव भारत की पवित्र धरा पर ही रखी गई थी।
राष्ट्रवाक् दृष्टि: अपनी ज्ञान धरोहर का संरक्षण और संवर्धन ही किसी राष्ट्र की बौद्धिक अमरता का प्रमाण है। डिजिटल धरोहर मिशन भारत के गौरव का पुनर्जागरण है।


