संपादकीय डेस्क। स्वाधीनता के अमृत महोत्सव से अमृत काल की ओर बढ़ते भारत के ऐतिहासिक मोड़ पर राष्ट्रवाक् पत्रिका का विशेषांक ‘संकल्प से सिद्धि तक’ राष्ट्र को समर्पित किया गया है। यह विशेषांक केवल पिछले 75 वर्षों के इतिहास का लेखा-जोखा नहीं है, बल्कि यह आगामी 25 वर्षों के उस अमृत काल का मार्गदर्शक दस्तावेज है, जो भारत को 2047 तक विश्व की महाशक्ति और सांस्कृतिक विश्वगुरु के रूप में प्रतिष्ठित करेगा।
75 वर्षों की चुनौतियां और भारत का अभ्युदय
विशेषांक के विभिन्न अध्यायों में स्वतंत्रता के समय देश के सम्मुख उपस्थित गंभीर चुनौतियों—विभाजन का दंश, खाद्य संकट, युद्ध और विदेशी दबाव—से लेकर आज के परमाणु संपन्न, अंतरिक्ष महाशक्ति और डिजिटल क्रांति के अग्रदूत बनने तक की गाथा को प्रमाणिक साक्ष्यों के साथ संकलित किया गया है।
विशेष रूप से इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि कैसे भारत ने औपनिवेशिक मानसिकता की बेड़ियों को तोड़कर अपनी सनातन जड़ों, स्वदेशी चिंतन और आत्मनिर्भर विज्ञान को विकास का मूल मंत्र बनाया है।
“यह शताब्दी भारत की शताब्दी है। हमारी प्राचीन ज्ञान परंपरा और आधुनिक वैज्ञानिक पुरुषार्थ का यह संगम विश्व को एक नई दिशा देने में सक्षम है।”
— राष्ट्रवाक् विशेषांक संपादकीय मंडल
विशेषांक के प्रमुख खंड और शोध आलेख
- सांस्कृतिक संप्रभुता का पुनर्जागरण: तीर्थों का पुनरुद्धार और भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) का वैश्विक प्रभाव।
- आर्थिक महाशक्ति की ओर अग्रसर: 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था से विकसित भारत 2047 तक की संपूर्ण कार्ययोजना।
- रक्षा में आत्मनिर्भरता: स्वदेशी मिसाइल तकनीक, तेजस और आईएनएस विक्रांत से लैस अजेय भारत।
- युवा और महिला शक्ति: स्टार्टअप्स और नवाचार में भारत की आधी आबादी और युवाओं की ऐतिहासिक भागीदारी।
अमृत काल का राष्ट्रीय संकल्प
प्रत्येक जागरूक नागरिक, शोधार्थी और देशभक्त के लिए यह विशेषांक संग्रहणीय है। यह हमें स्मरण कराता है कि हमारा दायित्व केवल आज की सुख-सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वर्णिम भारत का निर्माण करना है।
राष्ट्रवाक् दृष्टि: ‘संकल्प से सिद्धि’ की यह यात्रा हर भारतवासी के पसीने और पुरुषार्थ से पूर्ण होगी। 2047 का विकसित भारत हमारा परम ध्येय है।

