नागपुर/देवलापार ब्यूरो। नागपुर स्थित देवलापार के गो-विज्ञान अनुसंधान केंद्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने 5 नए आधुनिक गो-अनुसंधान प्रकल्पों का विधिवत लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारतीय गाय केवल श्रद्धा का विषय नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, जैविक कृषि और मानव स्वास्थ्य का वैज्ञानिक आधार है। जब तक गोवंश को ग्रामीण जीवन से नहीं जोड़ा जाएगा, तब तक वास्तविक स्वावलंबन प्राप्त नहीं हो सकता।
लोकार्पित किए गए 5 नए आधुनिक प्रकल्प
देवलापार केंद्र में दशकों से गो-उत्पादों (पंचगव्य) पर वैज्ञानिक शोध हो रहा है। आज लोकार्पित किए गए प्रकल्पों में अत्याधुनिक पंचगव्य औषधि निर्माण प्रयोगशाला, उन्नत बायोगैस और बायो-सीएनजी संयंत्र, जैविक उर्वरक शोध इकाई, देशी नस्ल सुधार केंद्र और ग्रामीण युवाओं के लिए गो-उद्यमिता प्रशिक्षण केंद्र शामिल हैं।
वैज्ञानिकों ने प्रमाणित किया है कि गोमूत्र और गोबर से तैयार की जाने वाली दवाएं और उर्वरक न केवल मिट्टी की उर्वरता लौटाते हैं, बल्कि कैंसर और त्वचा रोगों जैसी गंभीर बीमारियों के उपचार में भी सहायक सिद्ध हो रहे हैं। इन प्रकल्पों से आसपास के सैकड़ों गांवों के किसानों को सीधे प्रशिक्षण और आजीविका मिलेगी।
“गाय केवल खूंटे से बांधने के लिए नहीं है। जब एक किसान गाय को अपनी खेती और ऊर्जा का केंद्र बनाता है, तो वह कर्जमुक्त और आत्मनिर्भर बन जाता है। यही हमारी संस्कृति का अर्थशास्त्र है।”
— डॉ. मोहन भागवत जी, सरसंघचालक (RSS)
प्रकल्पों की प्रमुख विशेषताएं
- बायो-सीएनजी और ऊर्जा स्वावलंबन: गोशाला के गोबर से ऊर्जा उत्पादन, जिससे गांव के घरों को स्वच्छ ईंधन मिलेगा।
- प्राकृतिक कृषि का संवर्धन: रासायनिक खादों और कीटनाशकों से मुक्ति के लिए ‘जीवामृत’ और ‘घनजीवामृत’ का व्यापक उत्पादन।
- गो-चिकित्सा का वैज्ञानिक प्रमाणीकरण: CSIR और IIT के सहयोग से पंचगव्य के औषधीय गुणों का मानकीकरण।
- युवा गो-उद्यमी तैयार करना: प्रतिवर्ष 5000 युवाओं को गो-आधारित उत्पादों के निर्माण और विपणन का प्रशिक्षण।
ग्राम स्वावलंबन से राष्ट्र निर्माण
देवलापार का यह मॉडल देश की सभी गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने का मार्ग प्रशस्त करता है। गाय यदि आर्थिक रूप से उपयोगी सिद्ध होगी, तो कोई भी किसान उसे बेसहारा नहीं छोड़ेगा।
राष्ट्रवाक् दृष्टि: गो-माता ग्रामीण समृद्धि की आधारशिला है। देवलापार के आधुनिक प्रकल्प प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के अद्भुत समन्वय का प्रेरक उदाहरण हैं।

