आर्थिक समीक्षा डेस्क। जब विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं—अमेरिका, यूरोप और चीन—मंदी की आहट, उच्च मुद्रास्फीति और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के भंवर में फंसी हैं, तब भारतीय अर्थव्यवस्था 7% से अधिक की अनुमानित विकास दर के साथ वैश्विक आर्थिक विकास का सबसे चमकदार सितारा बनी हुई है। राष्ट्रवाक् मासिक पत्रिका के इस नवीन अंक की आवरण कथा में भारत की इस अभूतपूर्व आर्थिक उड़ान के मूल कारणों, विनिर्माण क्षेत्र के पुनरुत्थान और घरेलू उपभोग की ताकत का विशद विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
पीएलआई योजना और विनिर्माण में ऐतिहासिक उछाल
बीते कुछ वर्षों में भारत सरकार द्वारा शुरू की गई उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं ने इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल, ऑटोमोबाइल, फार्मास्युटिकल और टेक्सटाइल क्षेत्रों में क्रांति ला दी है। जो भारत कभी 90% से अधिक मोबाइल फोन आयात करता था, आज वह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता और प्रमुख निर्यातक बन चुका है।
एप्पल और फॉक्सकॉन जैसी वैश्विक दिग्गज कंपनियों ने चीन से अपना विनिर्माण भारत स्थानांतरित करना शुरू कर दिया है। इसके साथ ही रक्षा विनिर्माण में स्वदेशी कंपनियों का निर्यात 21,000 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है, जो भारत के आत्मनिर्भर रक्षा विजन की ठोस सफलता है।
“भारत अब केवल एक विशाल उपभोग बाजार नहीं रहा, बल्कि वह उच्च गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धी लागत के साथ दुनिया की फैक्ट्री बनने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है।”
— मुख्य आर्थिक सलाहकार
मासिक अंक की आवरण कथा के प्रमुख स्तंभ
- डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI): यूपीआई, आधार और ओएनडीसी ने भारत की अनौपचारिक अर्थव्यवस्था को औपचारिक वित्तीय धारा से जोड़ा।
- कैपेक्स (पूंजीगत व्यय) का रिकॉर्ड निवेश: रेलवे, एक्सप्रेसवे, हवाई अड्डों और बंदरगाहों के आधुनिकीकरण पर 11 लाख करोड़ रुपये से अधिक का सरकारी व्यय।
- स्टार्टअप और यूनिकॉर्न पारिस्थितिकी तंत्र: 1 लाख से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स और 110 से अधिक यूनिकॉर्न के साथ भारत विश्व का तीसरा बड़ा स्टार्टअप हब।
- मुद्रास्फीति का कुशल प्रबंधन: वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और खाद्यान्न के संकट के बावजूद घरेलू कीमतों पर प्रभावी नियंत्रण।
5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर भारत
विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि आने वाले तीन से चार वर्षों में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है। यह प्रगति केवल आंकड़ों की बाजीगरी नहीं, बल्कि करोड़ों नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार और रोजगार के नए अवसरों का सृजन है।
राष्ट्रवाक् दृष्टि: आत्मनिर्भर भारत की यह आर्थिक विजय यात्रा राष्ट्र के स्वावलंबन और वैश्विक गरिमा की मजबूत नींव है।

