राष्ट्रवाक् साहित्य डेस्क। भारतीय पत्रकारिता और राष्ट्रीय चेतना के प्रमुख संवाहक ‘राष्ट्रवाक्’ द्वारा स्वाधीनता के अमृत काल के उपलक्ष्य में प्रकाशित ऐतिहासिक विशेषांक ‘संकल्प से सिद्धि तक’ का भव्य लोकार्पण समारोह संपन्न हुआ। 200 से अधिक पृष्ठों का यह विशेषांक स्वतंत्र भारत के 75 वर्षों के संघर्ष, सांस्कृतिक नवजागरण, आर्थिक आत्मनिर्भरता, अंतरिक्ष विजय और वर्ष 2047 तक भारत को परम वैभवशाली ‘विकसित भारत’ बनाने के विजन का एक प्रामाणिक महाग्रंथ है।
विशेषांक के केंद्रीय विचार और आलेखों की समृद्धि
इस विशेषांक में देश के मूर्धन्य अर्थशास्त्रियों, रक्षा विशेषज्ञों, इतिहासकारों, वैज्ञानिकों और आध्यात्मिक विचारकों के मौलिक आलेख संकलित किए गए हैं। विशेषांक में यह रेखांकित किया गया है कि 1947 में पराधीनता की बेड़ियों से मुक्त होने के बाद कैसे भारत ने अकाल, युद्ध, विभाजन की विभीषिका और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को झेलते हुए आज दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का गौरव हासिल किया।
विशेष खंडों में चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक लैंडिंग, डिजिटल इंडिया की क्रांति, यूपीआई का वैश्विक परचम, काशी-अयोध्या का सांस्कृतिक पुनरुत्थान और देश की सीमाओं की अजेय सुरक्षा पर विशेष शोधपरक सामग्री प्रस्तुत की गई है।
“राष्ट्रवाक् का यह विशेषांक केवल पन्नों का संकलन नहीं, बल्कि भारत के अमर संकल्प और अजेय पुरुषार्थ की गाथा है। यह हर भारतीय के हृदय में गर्व की ज्वाला प्रज्वलित करेगा।”
— प्रधान संपादक, राष्ट्रवाक्
विशेषांक ‘संकल्प से सिद्धि तक’ के मुख्य आकर्षण
- गुमनाम क्रांतिवीरों की अनकही गाथाएं: 1857 से 1947 तक के उन बलिदानियों का दस्तावेजीकरण जिन्हें इतिहास की मुख्यधारा में भुला दिया गया था।
- स्वदेशी अर्थव्यवस्था का रोडमैप: खादी और कुटीर उद्योगों से लेकर सेमीकंडक्टर और स्पेस-टेक तक आत्मनिर्भरता की संपूर्ण यात्रा।
- सांस्कृतिक संप्रभुता का पुनर्पाठ: भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) और औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति का दार्शनिक विश्लेषण।
- विजन 2047: सौवें स्वाधीनता वर्ष में कैसा होगा विकसित भारत—शिक्षा, स्वास्थ्य, रक्षा और विज्ञान का 25 वर्षीय खाका।
आगामी पीढ़ियों के लिए संग्रहणीय दस्तावेज
यह विशेषांक प्रत्येक पुस्तकालय, शोधार्थी और देशभक्त नागरिक के अध्ययन कक्ष की शोभा बढ़ाने योग्य है। राष्ट्रवाक् अपने पाठकों के समक्ष सदैव सत्य, राष्ट्रवाद और उच्च बौद्धिक गुणवत्ता की पत्रकारिता प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
राष्ट्रवाक् दृष्टि: राष्ट्र-जागरण का यह पावन यज्ञ तब तक अनवरत चलता रहेगा, जब तक भारत विश्व के सर्वोच्च शिखर पर पुनर्स्थापित नहीं हो जाता।

