पुणे ब्यूरो। भारत के स्वाधीनता संग्राम के प्रखर राष्ट्रभक्त, क्रांतिकारी और विचारक स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर के संपूर्ण वांग्मय को अब डिजिटल स्वरूप में संरक्षित कर दुनिया भर के शोधार्थियों और युवाओं के लिए निशुल्क उपलब्ध करा दिया गया है। पुणे में आयोजित एक राष्ट्रीय संगोष्ठी में ‘सावरकर डिजिटल धरोहर पोर्टल’ का औपचारिक लोकार्पण किया गया। इस डिजिटल संग्रह में 10,000 से अधिक पृष्ठों के दुर्लभ दस्तावेज, हस्तलिखित डायरियां, अंदमान जेल के अभिलेख और ऑडियो भाषण शामिल हैं।
सावरकर के वैचारिक दर्शन का प्रामाणिक दस्तावेजीकरण
दशकों से सावरकर के विचारों को लेकर राजनीतिक विवाद और भ्रांतियां फैलाई जाती रही हैं। आयोजकों ने स्पष्ट किया कि इस डिजिटल संग्रह का मुख्य उद्देश्य सावरकर के विचारों को बिना किसी तोड़-मरोड़ के उनकी मूल भाषा (मराठी, हिंदी और अंग्रेजी) में जनता के सामने लाना है।
इस संग्रह में उनकी कालजयी रचना ‘1857 का स्वातंत्र्य समर’, ‘हिंदुत्व’, ‘माझी जन्मठेप’ (मेरा आजीवन कारावास), सामाजिक सुधारों पर उनके क्रांतिकारी लेख (जातिभेद उन्मूलन, पतितपावन मंदिर निर्माण) और विज्ञाननिष्ठ दृष्टिकोण पर लिखे गए निबंधों को उच्च गुणवत्ता में डिजिटाइज किया गया है।
“जो समाज अपने वीरों और उनके विचारों को मूल रूप में नहीं पढ़ता, वह इतिहास के झूठे नैरेटिव का शिकार हो जाता है। सावरकर का वांग्मय राष्ट्रनिष्ठा का सबसे प्रखर दस्तावेज है।”
— मुख्य शोध निदेशक, सावरकर राष्ट्रीय स्मारक
डिजिटल संग्रह की प्रमुख विशेषताएं
- 10,000+ दुर्लभ पृष्ठ ऑनलाइन: मूल हस्तलिखित पांडुलिपियों और ब्रिटिश खुफिया रिकॉर्ड्स का उच्च रेजोल्यूशन में डिजिटलीकरण।
- सामाजिक सुधारों का दस्तावेज: अस्पृश्यता निवारण, अंतरजातीय सहभोज और भाषा शुद्धि पर सावरकर के क्रांतिकारी कदमों का प्रामाणिक ब्योरा।
- कालकोठरी की अमर कविताएं: सेलुलर जेल की दीवारों पर कांटों और कोयले से लिखी गई महाकाव्यात्मक कविताओं का संकलन।
- सर्च-सक्षम डिजिटल लाइब्रेरी: विषय, वर्ष और कीवर्ड के आधार पर सेकंडों में संदर्भ खोजने की आधुनिक सुविधा।
युवा पीढ़ी के लिए वैचारिक प्रेरणा
यह डिजिटल संग्रह देश-विदेश के विश्वविद्यालयों और शोधार्थियों के लिए अध्ययन का अमूल्य स्रोत बनेगा। सावरकर का राष्ट्र-प्रथम और विज्ञाननिष्ठ दृष्टिकोण 21वीं सदी के भारत के निर्माण में आज भी उतना ही प्रासंगिक है।
राष्ट्रवाक् दृष्टि: सावरकर का संपूर्ण जीवन राष्ट्र-समर्पण और बौद्धिक निर्भीकता का पर्याय है। इस डिजिटल संग्रह से सत्य की विजय सुनिश्चित होगी।

