सावन के विशेष योग: शिवालयों में उमड़ा आस्था का जनसैलाब, देश भर में हर-हर महादेव की गूंज

पवित्र सावन मास के दुर्लभ योगों में द्वादश ज्योतिर्लिंगों समेत देशभर के शिवालयों में श्रद्धालुओं का अपार जनसैलाब उमड़ पड़ा। हर-हर महादेव के जयकारों से दिशाएं गूंज उठीं।

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Oct 9, 2026, 08:24 pm IST
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वाराणसी/उज्जैन विशेष। पावन सावन मास के प्रारंभ के साथ ही देशभर के प्रमुख शिवालयों और ज्योतिर्लिंगों में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत ज्वार उमड़ पड़ा है। इस वर्ष सावन में सोमवार, प्रदोष व्रत और दुर्लभ नक्षत्रों के अद्भुत संयोग बन रहे हैं, जिससे जलाभिषेक का महत्व कई गुना बढ़ गया है। काशी विश्वनाथ, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, केदारनाथ और बैद्यनाथ धाम में भोर से ही लाखों भक्त कतारबद्ध होकर गंगाजल और बेलपत्र अर्पित कर रहे हैं।

सावन और शिव तत्व का गूढ़ रहस्य

सनातन परंपरा में सावन मास को प्रकृति के पुनर्जन्म और शिव तत्व की आराधना का मास माना गया है। भगवान शिव आशुतोष हैं, जो मात्र एक लोटा जल और तीन पत्तियों वाले बेलपत्र से प्रसन्न होकर अपने भक्तों के सभी संताप हर लेते हैं। इस दौरान कांवड़ यात्रा भी पूरे उत्तर भारत में सांस्कृतिक एकता और अनुशासन का एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत कर रही है।

लाखों की संख्या में कांवड़िए गंगा तटों से जल भरकर सैकड़ों किलोमीटर की पदयात्रा करते हुए अपने आराध्य को जल अर्पित करने निकल पड़े हैं। युवाओं से लेकर बुजुर्गों और महिलाओं तक, हर वर्ग में गजब का उत्साह और ऊर्जा देखने को मिल रही है।

“नगेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय। नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै न काराय नमः शिवाय॥”

— शिव पंचाक्षर स्तोत्र

सावन के दुर्लभ योग और विशेष आराधना

  • दुर्लभ नक्षत्र संयोग: इस वर्ष सावन के सोमवारों पर अमृत सिद्धि और सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग।
  • रुद्राभिषेक का विशेष फल: दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करने से मानसिक शांति और आरोग्य की प्राप्ति।
  • कांवड़ यात्रा का अनुशासित स्वरूप: प्रशासन और स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा कांवड़ियों के लिए भोजन, चिकित्सा और विश्राम की व्यापक व्यवस्था।
  • पर्यावरण संरक्षण का संदेश: मिट्टी के शिवलिंग निर्माण और हरित सावन के तहत वृक्षारोपण अभियानों का संचालन।

आस्था और सांस्कृतिक समरसता का महाकुंभ

सावन मास केवल व्यक्तिगत साधना का समय नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समरसता और प्रकृति प्रेम का अनुपम उत्सव है। जब लाखों लोग ऊंच-नीच के भेद भुलाकर ‘बोल बम’ के एक स्वर में चलते हैं, तो भारत की अमर एकात्मता जीवंत हो उठती है।

राष्ट्रवाक् दृष्टि: शिव आराधना अहंकार के विसर्जन और लोक कल्याण के प्रति समर्पण का मार्ग है। सावन का यह पावन पर्व देश में नव-ऊर्जा और शांति का संचार करे।

Rastrawak editorial desk reporting on national perspective, culture, literature, and news.

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