मोटा अनाज (श्रीअन्न) की थाली: मिलेट्स से पाएं भरपूर पोषण, डायबिटीज और मोटापे से मुक्ति

भारत की पहल पर वैश्विक पहचान पाने वाले मिलेट्स (श्रीअन्न)—ज्वार, बाजरा, रागी, कोदो, कुटकी—डायबिटीज, मोटापा और हृदय रोगों के खिलाफ प्रकृति का वरदान साबित हो रहे हैं।

Written by
•
Oct 10, 2026, 07:08 pm IST
•
⏱️ 3 min read

पोषण एवं स्वास्थ्य डेस्क। भारत सरकार के सतत प्रयासों और संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा ‘अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष’ घोषित किए जाने के बाद आज पूरी दुनिया भारतीय मोटे अनाजों (श्रीअन्न) के असाधारण पोषण मूल्यों का लोहा मान रही है। जो ज्वार, बाजरा, रागी, कोदो और कुटकी कभी केवल गरीबों और ग्रामीण क्षेत्रों का भोजन माने जाते थे, आज वे फाइव-स्टार होटलों के मेन्यू और फिटनेस विशेषज्ञों की पहली पसंद बन चुके हैं। अत्यधिक पॉलिश किए गए चावल और रिफाइंड गेहूं की तुलना में मिलेट्स पोषण का असली खजाना हैं।

डायबिटीज और मोटापे के खिलाफ अचूक ढाल

आधुनिक चिकित्सा शोधों से स्पष्ट हुआ है कि आज भारत में तेजी से बढ़ रही टाइप-2 डायबिटीज और मोटापे की मुख्य वजह रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट्स का अत्यधिक सेवन है। गेहूं और सफेद चावल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) बहुत ऊंचा होता है, जिससे भोजन के तुरंत बाद रक्त में शुगर का स्तर तेजी से बढ़ता है।

इसके विपरीत, मोटे अनाजों का ग्लाइसेमिक इंडेक्स बहुत कम होता है और इनमें भरपूर मात्रा में आहारीय रेशा (डायटरी फाइबर) पाया जाता है। यह पाचन की गति को धीमा करता है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है और इंसुलिन स्पाइक नहीं होता।

“श्रीअन्न केवल आहार नहीं, बल्कि हमारी प्राचीन कृषि का गौरव, किसानों का संबल और भावी पीढ़ियों के स्वास्थ्य का सुरक्षा कवच है।”

— पोषण वैज्ञानिक, ICMR-NIN

प्रमुख मिलेट्स और उनके अद्वितीय स्वास्थ्य लाभ

  • रागी (मंडुआ): कैल्शियम का सबसे समृद्ध स्रोत; बच्चों की हड्डियों के विकास और बुजुर्गों में ऑस्टियोपोरोसिस रोकने में रामबाण।
  • बाजरा: आयरन और फोलिक एसिड से भरपूर; एनीमिया (खून की कमी) को दूर करने और शरीर को प्राकृतिक ऊष्मा देने में सहायक।
  • ज्वार: ग्लूटेन-फ्री और मैग्नीशियम से भरपूर; हृदय स्वास्थ्य को दुरुस्त रखता है और कोलेस्ट्रॉल कम करता है।
  • कोदो और कुटकी: एंटीऑक्सीडेंट्स और पॉलीफेनोल्स का भंडार; लिवर को डिटॉक्स करने और वजन घटाने में अत्यंत प्रभावी।

पर्यावरण और जल संकट का टिकाऊ समाधान

मिलेट्स न केवल हमारे शरीर के लिए वरदान हैं, बल्कि धरती माता के लिए भी सबसे अनुकूल फसलें हैं। जहां एक किलो धान उगाने में 4000 लीटर पानी खर्च होता है, वहीं मिलेट्स बिना किसी रासायनिक खाद और बहुत कम पानी में बंजर जमीन पर भी लहलहा उठते हैं।

राष्ट्रवाक् दृष्टि: अपनी थाली में श्रीअन्न को पुनः स्थान देना अपने स्वास्थ्य की रक्षा और धरती के जल संरक्षण का सबसे बड़ा देशभक्तिपूर्ण कदम है।

Rastrawak editorial desk reporting on national perspective, culture, literature, and news.

[Read more]