मानसिक स्वास्थ्य एवं योग डेस्क। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी अब यह स्वीकार कर चुके हैं कि विश्व भर में बढ़ रहे हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, अनिद्रा और डिप्रेशन का सबसे प्रमुख कारण अनियंत्रित मानसिक तनाव (क्रोनिक स्ट्रेस) है। निरंतर प्रतिस्पर्धी माहौल और गैजेट्स के नीले प्रकाश ने हमारी मस्तिष्क तरंगों को अशांत कर दिया है। ऐसी स्थिति में प्राचीन भारतीय योग और प्राणायाम पद्धति एक वैज्ञानिक और बिना किसी दुष्प्रभाव वाली अचूक औषधि बनकर उभरी है।
न्यूरोलॉजिकल प्रभाव: जब सांस से शांत होता है मन
हमारे शरीर में श्वास और मन का सीधा संबंध है। जब हम क्रोध या भय में होते हैं, तो हमारी सांसें तेज और उथली हो जाती हैं। इसके विपरीत जब हम शांत होते हैं, तो सांसें गहरी और धीमी होती हैं।
प्राणायाम के माध्यम से जब हम जानबूझकर श्वास की गति को नियंत्रित और गहरा करते हैं, तो हमारे मस्तिष्क की वेगस नर्व (Vagus Nerve) उत्तेजित होती है। यह तंत्रिका तुरंत शरीर के सिम्पेथेटिक सिस्टम (फाइट या फ्लाइट मोड) को बंद कर पैरासिम्पेथेटिक सिस्टम (आराम और पाचन मोड) को सक्रिय कर देती है। इससे तनाव हार्मोन कोर्टिसोल का स्तर 40% तक घट जाता है और एंडोर्फिन व सेरोटोनिन जैसे हैप्पी हार्मोन्स का स्राव बढ़ जाता है।
“चले वाते चलं चित्तं निश्चले निश्चलं भवेत्। योगी स्थाणुत्वमाप्नोति ततो वायुं निरोधयेत्॥”
— हठयोग प्रदीपिका
मानसिक तनाव मुक्ति के लिए 4 प्रमुख यौगिक उपाय
- अनुलोम-विलोम (नाड़ी शोधन): प्रतिदिन 10 मिनट बाएं और दाएं नथुने से बारी-बारी सांस लेने से मस्तिष्क के दोनों गोलार्ध संतुलित होते हैं।
- भ्रामरी प्राणायाम: आंखें और कान बंद कर भौंरे की तरह गुंजन करने से उत्पन्न ध्वनि कंपन मस्तिष्क के न्यूरॉन्स को गहरी शांति प्रदान करता है।
- शीतली और सीत्कारी प्राणायाम: क्रोध, चिड़चिड़ापन और उच्च रक्तचाप को तुरंत शांत करने वाला प्राकृतिक शीतलक अभ्यास।
- योगनिद्रा और शवासन: दिन के कार्य के बाद 15 मिनट शवासन में चेतन रूप से शरीर को शिथिल करने से दिनभर की मानसिक थकान मिट जाती है।
आंतरिक शांति ही सच्ची सफलता
संसार की तमाम धन-दौलत और प्रतिष्ठा भी उस मन के सामने व्यर्थ है जो रात को चैन से सो नहीं सकता। योग हमें बाहर की परिस्थितियों को बदलने के बजाय भीतर के संतुलन को बनाए रखने की शक्ति देता है।
राष्ट्रवाक् दृष्टि: प्राणायाम सांसों का नियमन नहीं, बल्कि जीवन ऊर्जा का रूपांतरण है। आंतरिक शांति ही स्वस्थ जीवन का आधार है।


