वैचारिक विमर्श डेस्क। भारतीय समाज में एक शांत लेकिन अत्यंत क्रांतिकारी सामाजिक परिवर्तन आकार ले रहा है। देश के विभिन्न कोनों से मुस्लिम बेटियां अब कट्टरपंथी मौलानाओं के फतवों, तीन तलाक के डर और हिजाब की बंदिशों को दरकिनार कर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), नीट, खेल के मैदानों और कॉर्पोरेट बोर्डरूम्स में अपनी मेधा का परचम लहरा रही हैं। परंतु दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि जो स्वयंभू प्रगतिशील बुद्धिजीवी हर बात पर महिला अधिकारों का झंडा उठाते हैं, वे मुस्लिम बेटियों के इस वास्तविक सशक्तीकरण पर रहस्यमयी चुप्पी साधे रहते हैं।
सुधारों की रोशनी और कट्टरपंथ की छटपटाहट
तीन तलाक कानून की ऐतिहासिक समाप्ति ने मुस्लिम महिलाओं को सम्मान और सुरक्षा का नया संबल दिया। इसके बाद उच्च शिक्षा में मुस्लिम छात्राओं के नामांकन में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। मदरसों के स्थान पर आधुनिक कंप्यूटर, विज्ञान और गणित की शिक्षा की मांग अब स्वयं मुस्लिम परिवारों के भीतर से उठ रही है।
जब मुस्लिम युवतियां खेल की पोशाक में देश के लिए पदक जीतती हैं या स्टार्टअप्स शुरू करती हैं, तो कट्टरपंथी जमात उन्हें धर्म से बेदखल करने की धमकियां देती है। उस समय कथित नारीवादी संगठनों की चुप्पी उनके दोहरे चरित्र और वोट-बैंक की राजनीति को बेनकाब कर देती है।
“संविधान ने हमें बराबरी का अधिकार दिया है। हम 21वीं सदी की बेटियां हैं; हमारी उड़ान को 1400 साल पुरानी बंदिशों में कैद नहीं रखा जा सकता। हमें शिक्षा और सम्मान चाहिए।”
— शबनम परवीन, यूपीएससी सफल अभ्यर्थी
मुस्लिम बेटियों की प्रगति के प्रेरक आयाम
- उच्च शिक्षा में ऐतिहासिक वृद्धि: मेडिकल, इंजीनियरिंग और प्रशासनिक सेवाओं में मुस्लिम बेटियों की संख्या में पिछले 5 वर्षों में 35% का इजाफा।
- तीन तलाक से मुक्ति का सुकून: तलाक की तलवार हटने से पारिवारिक स्थिरता और बच्चियों के भविष्य में सुरक्षा का भाव।
- उद्यमिता में नई उड़ान: मुद्रा योजना और स्वयं सहायता समूहों के जरिए लाखों मुस्लिम महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी हुईं।
- समान नागरिक संहिता (UCC) का समर्थन: पैतृक संपत्ति में अधिकार और विवाह की कानूनी उम्र की बराबरी की मांग के प्रति महिलाओं का सकारात्मक रुख।
बौद्धिक पाखंड को ध्वस्त करती नई सुबह
सच्चा नारी सशक्तीकरण तब होता है जब समाज की अंतिम पंक्ति में खड़ी बेटी बिना किसी भय के अपने सपनों को पूरा कर सके। भारत की बेटियां अब अपने अधिकारों को लेकर जागरूक हो चुकी हैं और कोई भी कट्टरपंथी जंजीर उनके हौसले को नहीं रोक सकती।
राष्ट्रवाक् दृष्टि: राष्ट्र का समग्र विकास तभी संभव है जब हर बेटी को स्वतंत्रता और अवसर की समान धूप मिले। यह सामाजिक जागृति नए भारत की शक्ति है।

